*इलाहाबाद में लोक सेवा आयोग कार्यालय को प्रदेशभर से आये हज़ारों प्रतियोगी छात्रों ने आयोग की परीक्षाओं से नॉर्मलाइजेशन ख़त्म करने और आयोग द्वारा परीक्षा को एक दिन में तथा एक ही शिफ्ट में कराने की मांग को लेकर घेर रखा है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश में हर बार पीसीएस प्री की परीक्षा एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाती थी लेकिन इस बार आयोग ने नोटिस जारी कर यह फरमान दिया कि पीसीएस प्री 2024 और फरवरी में पर्चा लीक होने की वजह से रद्द हुई आरओ/ एआरओ प्रारम्भिक परीक्षा 2023 को क्रमशः 7 और 8 दिसम्बर को और RO/ARO की परीक्षा जो 22 और 23 दिसम्बर को दोनों परीक्षा दो दिन में दो पालियों में आयोजित होगी।* 




*पिछले कई सालों से आयोग की कार्यप्रणाली और साल दर साल आयोग द्वारा आयोजित* *परीक्षाओं में धांधली से परेशान छात्रों ने इस नोटिस का विरोध करना शुरू कर दिया।* *प्रदेश भर में इसके ख़िलाफ़ जगह-जगह पैदल मार्च और सभाएं* *आयोजित हुई और आज के दिन लोक सेवा आयोग के घेराव का आह्वान किया गया था।* 

छात्रों ने अपने इस आन्दोलन की घोषणा एक सप्ताह पहले ही कर दी थी। पिछली बार यानी फरवरी में RO/ARO का पेपर लीक के बाद दुबारा एग्जाम करवाने की मांग को लेकर हुए हज़ारों छात्रों के आन्दोलन के सामने योगी सरकार को झुकना पड़ा था। पिछली बार से सबक लेते हुए बौखलायी योगी सरकार ने इस बार आन्दोलन के पहले ही अपनी पुलिस को सक्रिय कर दिया।

इलाहाबाद पुलिस पिछले कई दिनों से Disha Students' Organization/ दिशा छात्र संगठन के सचिव अविनाश और अन्य कार्यकर्ताओं की खोज में लगी हुई है। उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रशासन का यह आम रवैया बन गया है कि छात्रों-युवाओं के किसी भी प्रदर्शन से पहले ही वह दिशा छात्र संगठन के और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं की खोजबीन और उनको परेशान करने में जुट जाती है।‌

परीक्षाओं में धांधली के ख़िलाफ छात्रों में बढ़ते आक्रोश से उत्तर-प्रदेश की फ़ासिस्ट योगी सरकार की बौखलाहट का आलम यह है कि कल रात से ही घोषित प्रदर्शन स्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल लगा कर चारों तरफ से बैरिकेडिंग कर दी गयी थी। कई वाटर कैनेन, पुलिस की गाड़ियां और अग्निशमन की गाड़ियां लगा दी गई थी। सुबह जब छात्र 100 - 200 की संख्या में इकठ्ठा होने लगे तब पुलिस द्वारा लाठीचार्ज कर छात्रों को तितर-बितर कर दिया गया। लेकिन बाद में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों समेत बिहार, मध्य प्रदेश और दिल्ली से आए 10 हज़ार से ज़्यादा अभ्यर्थियों ने सड़क को जाम कर दिया तब मज़बूरी में पुलिस ने बैरिकेडिंग हटा दी। आयोग और उत्तर-प्रदेश सरकार के गैरलोकतांत्रिक व्यवहार का आलम यह है कि सुबह से प्रदर्शन कर रहे हज़ारों छात्रों से बात करने आयोग का कोई प्रतिनिधि अभी तक नहीं आया है।

एक तरफ़ अमेरिका में जाकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा "भारत को लोकतन्त्र की मां" कहा जाता है दूसरी तरफ़ अपने हक़ के लिए संघर्ष करने वाले छात्रों को लाठी-डण्डों से दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जा रहा है 

इन फ़ासिस्टों की यही असलियत है अपने अधिकारों को लेकर जनवादी तरह से किये जाने वाले हर विरोध-प्रदर्शन का दमन करना।


*दिशा छात्र संगठन छात्रों के इस आन्दोलन का पुरजोर समर्थन करता है और छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में भर्त्सना करता है।*