नये कृषि कानूनों को
आसान भाषा में समझिए ।
कृषि (संशोधन) अधिनियम 1
लाभ -इसके अंतर्गत कृषक जो उत्पाद को पहले राज्य के अन्दर ही बेच पाते थे, अब वो राष्ट्रीय स्तर पर कही भी बेच पाएंगे +केंद्र सरकार द्वारा यह नियम सारे राज्यों पर लागू होगा।
हानि - कृषि विषय, संविधान के 7अनुसूची में राज्यो को दिया गया है, इस पर राज्य अपने हिसाब से कानून बनाते हैं, इस पर केंद्र सरकार एक मॉडल कानून बना सकती है जिसे चाहे तो राज्य सरकार स्वीकार करे या नही , पर यहाँ इसमें सभी राज्यो पर एक समान रूप से थोपा जा रहा है।, इससे राज्यो को जो इससे जो टैक्स मिल रहा था, बन्द हो जाएगा, वो पहले से ही वित्त आयोग के सामने कटोरा लिए खड़े रहते हैं ,उन्हें और इसका सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रीय स्तर पर उत्पादों की इस तरह से बिक्री से बड़ी बड़ी कंपनियों को फायदा होगा, जबकि किसानों का शोषण।
इसका उदाहरण आप कहेंगे तो मैं और दे सकता हूँ।
कृषि (संशोधन) अधिनियम 2
विषय-कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग
कांट्रैक्ट फार्मिंग में किसानों और कंपनियों/ग्राहकों में एक अग्रिम समझौता है,बिक्री का कीमत भाव, आपूर्ति, चीजे क्या कंपनी को मुहैय्या होंगी, आदि का अनुबंध है । मतलब फसल तैयार होने से पहले ही दोनों के बीच समझौता।
लाभ - शिक्षित/बड़े /रसूखदार किसानों को लाभ होगा।
हानि - भारत मे अधिकतम किसान 1 हेक्टेयर से कम वाले है, जिन्हें पेट पालने के लिए मजदूरी भी करनी पड़ती, यदि कंपनी का दबाव पूर्व या बाद में किसान पर हो जाएगा, तो ये बेचारे दब जाएंगे इनके रसूख से । विवाद निपटारा एसडीएम के अंतर्गत होने के लिए कहा गया है, आप ये सोच लीजिए ,जब एक सिपाही गांव में अपना धौंस और रौब दिखा के असहायों को धमका सकता है तो इस स्तर पर इनकी हालात क्या होगी। इसके साथ ही e-NAM की असफलता, एफसीआई में उत्पादों का खराब होते रहना, एमएसपी की स्थिति और कोल्डस्टोरेज और भंडारण की बेहद खराब नियोजन, लगातार फसल के दामो का बढ़ना(प्याज, दाल, तेल जैसी चीजें हम देखे हैं और देख भी रहे हैं) इन सब के मकड़जाल में किसान फंस जाएगा और वह वही का वही रहेगा , कुछ चंद लोगो का बिजनेस चमकेगा ।।
कृषि (संशोधन) अधिनियम 3
विषय - आवश्यक वस्तु (संशोधन)अधिनियम
पूर्व की स्थिति -1955 के कानून में दाल, आलू, प्याज ,तेल जैसी आवश्यक चीजो के व्यापारियों द्वारा किये स्टॉक सीमा को रोकती थी , जिससे इन चीजों का प्रवाह बाजार में बना रहता था , बाजार के नियमो के अनुसार मांग और पूर्ति में समन्वय के आधार पर वस्तु का मूल्य तय होता रहा है।
आज की स्थिति - 2020 में संशोधन के पश्चात स्टॉक की सीमा समाप्त कर दी गयी है, अब व्यापारियों द्वारा किसी भी आवश्यक वस्तुओं को भण्डारण किसी भी मात्रा तक किया जा सकता है। इससे नुकसान क्या होगा कि वस्तुओं के प्रवाह को बाजार से रोककर अपने पास भंडारण कर लेने से बाजार में उस चीज की मांग बढ़ेगी, मांग बढ़ने से उस चीज का दाम स्वतः बढ़ने लगेगा और उस बढ़े दाम से ये चंद व्यपारी लाभ उठाएंगे । किसान तो मारा ही जायेगा न क्योंकि उससे तो एमएसपी पर वस्तुओं को खरीद ही लिया जाएगा पर बाद में इन वस्तुओं का दाम , आपूर्ति प्रवाह के रुकने से जो बढ़ेगा उससे किसानों को नही उन चंद व्यापारियों का ही लाभ होगा वो भी अनुचित तरीके से ।
यहाँ एक चीज और है इससे छोटे/मझोले व्यापारियों का लाभ नही होगा क्योंकि उनके पास उच्च कोटि के भंडारण करने के तकनीक और क्षमता और कोल्डस्टोरेज नही होता ये केवल बडे उद्योगपतियों के पास ही होता है जो बड़े पैमाने पर धन को खर्चा कर इसका निर्माण कराते है। यह छोटे/मझौले किसान और व्यापारियों का नुकसान ही होगा ।।
*अंकित विश्वकर्मा "चंद्रा"*
*छात्र*
*इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय*
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